रविवार, 18 जनवरी 2009

जन-गण-मन गीत अधिनायक बनाम गुलामी

यदि यह सच हैं कि जन -गण -मन गीत अंग्रेजों के सम्राट जार्ज पंचम के भारत आगमन पर रविन्दनाथ ठाकुर द्वारा स्वागत गीत के रूप में इसे गाया गया था, तो आज भी हम किस अधिनायक के लिये इस गीत को स्वीकार किए हुए हैं यह गंभीर चिंतन का विषय हैं ,चुकी देश गणतांत्रिक हैं तो जन-गण -मन ,गणतांत्रिक जयहे,भारत भाग्य विधाता गाना चाहिए था ,परन्तु आज भी अंग्रेजों के अधिनायक बनाम गुलामी के दिनों का गीत गाते हुए एक बार भी हम यह चिंता करते हैं कि गीत का गंभीर भावार्थ क्या हैं ? यदि ऐतिहासिक भूल के कारण या किसी दवाव से इस गीत को अंगीकार करने में हम मजबूर थे तो आजादी के पश्चात इस गीत को बदल देना आवश्यक था, अंग्रेजों को यदि भारत के भाग्यविधाता मानकर चलने के लिये बच्चों को सिखाया जायगा तो देश प्रेम ,राष्ट्रीयता , आदि शब्द किस अर्थ में लिया जाएगा, यह सोचना हमारा कर्तव्य नहीं ,नेताओं पर छोड़ दे ???

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