गुरुवार, 23 जुलाई 2009

शिक्षिका को नंगी करके रंग रगड़ा गया -न्याय न मिलने पर मांग रही हैं इच्छा मृत्यु -2

जशपुर नगर के केंदपानी स्थित जिस पाठशाला में सुनीता पढाती थी वहॉं जातिवाद आज भी चरम सीमा पर हैं,अत: छुआछुत मानने वाले यह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चों को एक नीच जाति के शिक्षिका पढाए , गॉंव के स्कुलों में मध्यान्ह भोजन की व्यावस्था सरकार द्वारा किया जाता हैं ,यदि सुनिता द्वारा बच्चों के भोजन को छु दिया जाता तो गॉंव के कुछ लोग उस भोजन को खाने नहीं देते थे छींटाकशी ,अपमान सभी सहन करते हुए सुनिता ने शिक्षण कार्य जारी रखा ,चूंकि सुनिता को गॉंव से भगाने की षडयंत्र कुछ लोगों ने रचा था, जिसके तरह दिनांक 11 मार्च 2009 ,पवीत्र होली के दिन बौखलाये हुए कुछ लोग सुनिता बंजुआ के घर में घुस कर उसे बाहर निकाले और उसे सेरेआम पिता और अबोध बालक समेत समस्त गॉंव वालों के समक्ष नंगे करते हुए सारे शरीर पर होली का रंग मलते हुए मौत का डर दिखाकर घंटों खड़ा करके ठहाकें लगाते रहे । इसके बाद जो कुछ हुआ इसकी जानकारी पूर्व लेख में दिया जा चुका है । चूंकि त्यौहारों के दिन शराब पीना आम बात हो गई हैं और गॉंव में तो सामान्य सी बात हैं, अत: होली के दिन सुनिता ने भी नशा की होगी ,इसी नशे का बहाना बना कर उन्ही लोगों ने एक शिक्षिका को सरेआम निर्वत्र कर मानव समाज को कलंकित कर दिया । इस मुद्दे को समाचार पत्रों द्वारा उठाया तो गया ,परन्तु प्रिंट मिडीया का कहीं नामोनिशाना नहीं मिलता । दिनांक 23 जुलाई 2009 को पुलिस ने गॉंव के कुछ लोगों को गि्रफ्तार किया ,परन्तु अब गॉंव के ही कुछ लोग शिक्षिका पर चरित्रहीन होने और शराबी होने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्यावाही को गलत साबित करने के लिए प्रशासन से मिलना शुरू किया हैं । बात शराबी होना ,चरित्रहीन होना आदी का नहीं हैं ,एक स्त्री को निर्वत्र कर उस पर रंग रगड़ते हुए, नंगे खड़े करना और फिर गांव से चले जाने को मजबूर करना....किसी भी किंमत पर स्वीकार्य नहीं हैं ।कल लिखा गया पोस्ट को मैंने रेजिश्ट्री करने हेतु तैयार रखा था ,परन्तु लेख चूँकि आग में घी का काम करता ,यह सोच कर पत्र को रेजिश्ट्री नहीं किया ,कुछ साथी शासन -प्रशासन पर दबाव बनने लगे है, ताकि सुनीता को न्याय मिल सकें ,लकिन मैं वर्तमान अराजक देश में यह आशा नहीं कर सकता कि आगे भी इसी तरह की घटना नहीं घटेगी !!!!ब्लोगार्स साथियों की सक्रियता और प्रतिक्रिया के कारण भी इस प्रकरण में नया मोढ लेना शुरू कर दिया है, महिनों भर चुप बैठी शासन -प्रशासन अब कुछ तो कर रही है ,हो सकता है यही `कुछ´अन्य संगठनों और महिला आयोग को भी सक्रिय कर दें ,मानवअधिकार के समर्थक भी आगे आए ...परन्तु हमें तो बर्बरता पर संघर्ष करते रहना है ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत दुखद समाचार है ऐसे लोगों को तो सरेआम फाँसी पर चढा देना चाहिये सरकार को इस पर कडी कार्यवाइ करनी चाहिये आभार्

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  2. और भद्र लोग ये कहते फिरते हैं कि जातिवाद ख़त्म हो रहा है ...अब कहाँ है जातिवाद... और अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो मुंह फेर लेते हैं...चुप्पी साध लेते हैं

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  3. यह सब क्या हो रहा है, बहुत गलत है यह !

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