शनिवार, 25 जुलाई 2009

भूतपूर्व राष्ट्रपति कलाम जी का चीरहरण कर एक विमान कंपनी ने अपमान किया -यदि यही हाल राष्ट्रपत्नी का हो तो !!

जब सामान्य जन पर अत्याचार होता है ,तो नेताओं को जश्न मनाने का सुनहरा अवसर प्राप्त होने के कारण जनता का सहानुभूती प्राप्त हो ,इस हेतु मुआवजा बॉंटे जाते हैं , एक करोड़ बॉंटने के लिए 3 करोड़ रूपये सरकारी खर्च हो जाता है ,अब राष्ट्रपति पर अत्याचार हुआ वह भी एक भु.पू राष्ट्रपति पर एक अमेरिकी विमान कंपनी ने श्री ए.पी.जे अब्दुल कलाम का चीर हरन करके वापस कर दिया ,हम हल्ला इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे राष्ट्रपति थे ,अब प्रश्न यह उठता हैं कि राष्ट्रपति के साथ तो हमेशा अंग रक्षक हुआ करता हैं, यदि वे नहीं चाहते कि उनके चीर हरण हो तो क्या मजाल कि एक आदना सा विमान कंपनी राष्ट्रपति का अपमान कर सकें । भु पू हुआ तो क्या हुआ ...ए पी जे अब्दुल कलाम के लिए दूनियॉ के सभी हिस्तयॉं मान-सम्मान रखते हैं ,यदि चीर हरण पर एपीजे अब्दुल कलाम जी को अपमान नहीं हुआ तो हम किसके लिए अपमान पर चिल्हाते हैं ,विचारनीय प्रश्न हैं । यदि कलाम जी को अपमान का अहसास होता तो वे उस हवाई जहाज पर सफर ही न करते ....यदि बहुत आवश्यक होता तो अन्य विमान की व्यावस्था किया जा सकता था , पिछले कुल समय से विमान कंपनीयों ने चुन -चुन कर हमारे शिर्ष्य नेताओं और मंत्रीयों का चिर हरन करने में लगे हुए हैं ,भुपू रक्षामंत्री ,भुपू अर्थमत्री सभी का चिर हरण हुआ ,ये मंत्रीयों को जब नंगा करके जॉंच किया जाता हैं तो ये चुपचाप सब कुछ करने देते है जैसे धारा 377 में होता हैं, और जब देश में लौट आते हैं ,तो यहॉं आकर भी चुप चाप दुबके रहते हैं यदि कोई मिडीया ने मान अपमान की बात करने लगे तो कोई प्रतिक्रिता भी नहीं होता हैं ,अब फिर हम उन बेशर्म लोगों के लिए लड़ते रहे ,लिखते रहें ,हमे खा पीकर कोई काम नहीं हैं क्या ?एक राष्ट्रपति ने न्याय व्यावस्था पर बहुत चिल्हाये ,क्या न्याय व्यावस्था में सुधार हुआ हैं ? क्या देश सोने की चिडियॉं बन सका हैं ? राष्ट्रपति बनने पर हमें क्या मिल गया ? एक वैज्ञानिक के नाते देश को मिशाईल मिला ,देश को साहस मिला ,दुनियॉं में नाम हुआ ,परन्तु एक राष्ट्रपति याने रबर स्टाम्प बनके कलाम जी ने तो कुछ भी नहीं कर पाए । अनेक विद्वानों का तो मत हैं कि इसतरह की पद समाप्त कर देना चाहिए ,क्योंकि जनता का जितना धन राष्ट्रपति के शान ओ शौकत में खर्च हो जाता हैं वह इस देश के सेहत के लिए उचित नहीं हैं । एक राष्ट्रपति को सारी सुविधा देने के पश्चात भी यदि देश के शान को बरकरार न रख सके, तो मेरे मत में तो उन पर जनता के अदालत में खड़े करके न्याय सुनाना चाहिए ,स्वयं दोषी को कोई सहानुभूति दिखाने की आवश्यकता ही क्या हैं ? क्या देश ने उनके लिए कोई कमी किया है?उन्हें देने में कोई कंजूसी किया है ? यदि नही तो कलाम जी ! आपका अपमान मात्र अपना अपमान नहीं , यह देश के साथ आज भी जुड़ी हुई हैं ,अत: हमेशा इस बात को याद रखने पर ही आपका कल्याण हैं .........कल यदि हमारे राष्ट्रपत्नी पर इस तरह की घटना घटे तो !!!!!!!!!!

1 टिप्पणी:

  1. सबकुछ सही है, लेकिन राष्ट्रपत्नी कोई शब्द नहीं होता, राष्ट्रपति एक पद है, वो चाहे महिला हो या पुरूष कहलाएगा, राष्ट्रपिता ही। उम्मीद है आप इसे समझेंगे।

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