शुक्रवार, 22 मई 2009

जय हो पान और पानवाले

पान डब्बे ! नाम से ही काम समझने में कोई कठिनाई नहीं होती ,जैसा नाम वैसा ही काम । मै इसे पी।आर.ओ अर्थात जन सम्पर्क आफिसर के नाम से ज्यादा पुकारता हूँ ,आपको किसी भी तरह की जानकारी चाहिए तो पान डब्बे में पहुँचिये बस आपका समस्या का समाधान हो गया । यदि किसी कारण से समाधान नहीं हो सका तो वही से कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा ,पान वाले आपको खाली हाथ नहीं भेजेगा ,यह नुक्शा अजमाया हुआ हैं ,शत प्रतिशत गारंटी के साथ । फला आदमी को जानते हैं ?जवाब मिलेगा हॉं साब ,कभी कभी मेरे यहॉं पान खाने चले आते हैं, सामने की गली से तीसरे मोढ में उनके घर हैं । भाई साब आज कल सुना हैं पान डब्बे में भांग की गोली मिल जाती है ,भंग नहीं साब -मदुर मुनक्का एक दम खाटी ,खाने से मजा आ जाता हैं । अच्छा भाई ये बताओं यहॉं कहीं ओ मिलना हैं क्या ?सिगरेट के साथ मिला कर पीना हैं । थोडा इधर उधर झाकने के पश्चात साब से यदि जंच गई तो साब मैं तो नहीं रखता पर मंगा दंगा -जरा रूक जाइए ,बस आपका माल हाजीर । किसी के लिए किसी को सुपाडी देना हैं तो पुछिए भाई एक दादा बताओ जो मेरा ये काम कर सकें ,कुछ न कुछ जवाब जरूर मिलेगा रास्ता बता देगा ,जरूरी हो तो किसी को साथ भी भेज देगा , आज कल सुना इस काम के लिए कुछ परसेंन्टेज तय हैं इसलिए आपका काम कुछ ज्यादा रूची से किया जाएगा । अरे भाई फलां कवि जी यही रहते हैं ? आपको इसका भी उत्तर मिल मिलेगा ,यदि आपको समय बिताना हैं तो खड़े रहिए और राजनैतिक , सामाजिक , धार्मिक , आर्थिक , छिटाकसी , रंगदारी जो भी इच्छा हो यहॉं सबके लिए बराबर का दर्जा प्राप्त हैं कोई न कोई आपके रूची का मिल ही जाएगा ,हॉं एक पान या गुटका या सिगरेट और कुछ भी नहीं तो एक चाकलेट ही सही खरीदना अच्छा रहेगा । आप डब्बे में घन्टों खड़े रहिए ,वह कभी नहीं बोलेगा कि भाई साहब पान बना दूँ ?आपके मांगने पर ही सब कुछ मिलेगा ,यहॉं बिन मांगे माती मिले वाली कहावत सच नहीं हो सकता हैं । खाय के पान बनारस वाला ,खुल जाय बंद अक्ल का ताला ,यह भी खुब मजे की बात हैं पान पॉंच रूपये से लेकर 50 रूपये तक मिलना आमबात हो चुका हैं ,बीबी को खुश करना हैं तो पान वाले को बता दो कि घर के लिए हैं फिर देखिए कितनी जतन से पान सज जाती हैं और सही मायने में घरवाली के साथ साथ आप भी खुश हो जायेंगे । अब यह तो राम कथा अनन्त वाली बात है पान भी कई तरह की और गुण भी अनेक प्रकार का ,एक बात आज लिखना गुनाह न होगा ,पढने पर कहानी जैसा लगेगा पर हैं 100 प्रतिशत सच । एक राजा के घर महाशय पान पहुंचाने जाते थे ,रानी साहिबा पान के शौकिन थी , एक समय राजा को भारत सरकार के मौखिक आदेश से स्थानीय शासन ने राजा को गोली का शिकार बनाया ,राजा मारा गया ,कुछ समय पश्चात रानी साहिबा पान वाले के घर रहने लगी ,पान का माया अपरम्पार हैं और पान वाले ! मुझे और आपको इस रहस्य को जानने के लिए शायद दूसरी जन्म लेना पडें । जय हो पान और पान वाले ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपने सही फ़रमाया है ,ये पी.आर.ओ. के साथ लोकल इनसायक्लोपिडीया भी होते है....मगर ....अफ़सोस की बात यह है..पाऊच कल्चर में...इनके धन्दे पर असर पड़ा है, इनकी कमी होती जारही है

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