बुधवार, 27 मई 2009

चमड़े की झोली -कुत्ता रखवार ,एक शेयर सौ बीमार

निवेश के बारे में अनेक लेख ,विचार -मंथन के पश्चात मुझे जो समझ में आया हैं उसे लिखना कोई अपराध नहीं हैं , कुछ लोग हो सकते हैं कि मुझे पूंंजीपतियों के विरोधी समझ बैठे ,परन्तु मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मुलत: मैं पूंजीपतियों का विरोधी नहीं हूं । परन्तु कुछ पूंजीपतियों द्वारा मात्र अपने हित के लिए दिन रात मात्र पूंजी एकत्रित करने में ही अपना धर्म समझने वालों को मैं समर्थन नहीं कर सकता । यहॉं पूंजीपतियों को तो यह भी पता नहीं होता कि वास्तव में उनके लिए हित क्या हैं और अहित क्या हैं ,उन्हें तो बस एक ही धुंध रहता हैं कि धन एकत्रित करते रहो । चिटियों की स्थिति सा जीवन भर धन इकट्ठा करना ही उनके लिए एकमात्र धर्म होता हैं । धनवान होना और पूंजी एकत्रित करने में बहुत अन्तर होता हैं । एक धनपति कुबेर बनने का सपना देखता हैं ,दूनियॉं में इतने धन सम्पत्ति हैं कि कई जन्म तक इकट्ठा करते रहने पर भी अधूरा ही रह जाता हैं । क्या इस दूनियॉ के सारे भूमि कोई खरीद सकता हैं ? क्या दुनियॉ के सारे सोने खरीदे जा सकते हैं ? क्या पानी पर पूरा कब्जा किया जा सकता हैं ? इसी तरह से अनेक उदाहरणों द्वारा धन सम्पत्ति के बारे में समझा जा सकता हैं । लोगों ने अपना धन प्यास बुझाने के लिए जनता से गलत तरिके द्वारा धन इकट्ठा करने लगे हैं । शेयर बाजार भी गलत तरीके से धन इकट्ठा करने का एक साधन हैं ,शेयर बाजार का कोई माई -बाप नहीं होता ,कहने को तो सरकार इस पर नियंत्रण करती है, ऐसा समझाया जाता हैं सेबी नामक संस्थान शेयर बाजार पर नियंत्रण करती हैं ,वास्तव में नियंत्रण मात्र नाम का होता है,यदि नियंत्रण होता तो शेयर बाजार से लाखों करोड़ रूपये ऐसे कंपनीयॉं जिसका कोई नाम निशान तक नहीं होता ,ले कर फरार हो सकते थे ? फर्जी कंपनीयां शेयर बाजार से रकम लेकर गायब कैसे हो जाते हैं?एक बार नहीं - काई बार और ये कंपनीयॉं शेयर बाजार से कई लाख करोड़ रूपये लेकर चम्पट हो जाती हैं और देश के जिम्मेदार पद पर बैठे लोग मात्र अपना वक्तव्य देकर जनता को बेवकुफ बनाती हैं । क्या येसब बगैर मिली भगत के सम्भव हो सकता हैं? कदापि नहीं । कुछ लोग पुछते हैं कि निवेश का सही समय कौन सा हैं ,यदि देश में एक भी ऐसी विशेशज्ञ मिले जो कि बता दे कि निवेश के लिए अमूक समय उचित हैं और उनके कहने से रकम लगाकर लाभ कमाया जा सकता हैं ,तब मैं उसका गुलाम बनने को तैयार हूं ,वर्तमान लुटपाट की बाजार मैं निवेश करने का अर्थ हैं अपनी खून पसिने की कमाई को दूसरों को देकर तालि बजाने के समान हैं । एक कहावत हैं कि ``चमडे की झोली और कुत्ता रखवार ।´´ एक सन्तुलित जीवन जीने के लिए जितनी आर्थिक संशाधन चाहिए उतना इस समाज से परिश्रम करके लेने में तो कोई हर्ज नहीं ,परन्तु यदि एक तलाब से पानी उठा -उठा कर मात्र अपनी खेत का ही सिंचाई किया जाए तो उस तलाब का उपयोग स्वार्थ सिद्धि के सिवाय कोई काम नहीं आता जबकि तलाब हमेशा जन कल्याण के लिए खुदवाया जाता रहा हैं । अनेक उदाहरण दिये जा सकते हैं संक्षेप में शेयर बाजार में रकम लगाना आज सॉंप को दुध पिलाने के समान हैं यदि जहरीले सॉंप से मौत बेमौत मरने की तमन्ना हैं तो शेयर बाजार में रकम लगाना चाहिए अन्यथा आज बैंक ,पोस्ट आफिस, जीवन बीमा निगम में रकम लगाना अधिक सुरक्षित हैं, कम से कम अपना रकम डुबता तो नहीं हैं । बीमा क्षेत्र में आज एक नया बिमारी शुरू हो चुकी हैं जिसे हम यूलिप कह सकते हैं ,यह यूलिप शेयर बाजार बेस पालिसी का रकम भी शेयर बाजार में निवेश किया जाता हैं, जिससे जनता का धन डुबने का अधिक सम्भावना बनी रहती हैं । अत: वर्तमान समय में देश के जागरूक जनता को शेयर की बिमारी से दूर रहना ज्यादा उपयुक्त हैं । अर्थ व्यावस्था सॉंप सिडी का खेल नहीं हो सकता हैं ।स्थिर व्यावस्था ही जीवन को सुरक्षा और शान्ति प्रदान कर सकती हैं इसके विपरीत जीवन को असुरक्षा और अशान्त बना कर नरक तुल्य कर देता हैं ।

1 टिप्पणी:

  1. शेयर बाजार में निवेश और रातों रात पैसा कमाने के लिए की गई सट्टे बाजी-दोनों में अंतर है भाई जी. दोनों को एक गठरी में न बाँधे.

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