रविवार, 8 फ़रवरी 2009

आकर्षक बने ,धनवान बने ,एक चुटकी में ---

आकर्षक बनने की लालसा किसे नहीं होता ?दुनियाँ में ऐसा कौन अभागा होगा जो स्मार्ट दिखना नहीं चाहता हैं ,कुछ बातों को यदि ध्यान में रख कर चला जाय तो आप भी आकर्षक बन सकते हैं ,आकर्षक बनने की चाहत मुझमें भी था, और आज भी हैं,आकर्षक व्यक्ति के पास धन की कमी नहीं होती,इसलिए मैं आकर्षक और धन दोनों को पूरक मानता हूँ ,मेरे पास विशेष करके नवयुवा -युवतीओं के संदेश आते हैं जिसमें अनेक बातों के साथ -साथ यह भी उल्लेख हैं कि आकर्षक कैसे बना जाय,बहुत दिनों से इसपर कुछ लिखने की इच्छा हो रही थी,इस लेखनी का श्रेय तमाम यूवा शक्ति को जाता हैं ,जिन्होंने मुझे इसके लिए प्रेरित किया,मैं मेरे अनुसरण कर्ताओं को आभार व्यक्त करना चह्ता हूँ -जिन्होंने मुझे अनेक सहयोग प्रदान किया हैं ;इस लेखनी और मेरे विचारों में मौलिक अन्तर नहीं हैं ,कोई भी विशेष उल्लेखनीय कार्य करने के लिए आकर्षक होना बहुत जरुरी हैं ,जो आकर्षक होगा वह धनवान भी होगा इस लेख को मैं क्रमशः प्रकाशित करना चह्ता हूँ , यह लेख लिक से हट कर,शिक्षाप्रद ऊर्जा से भरा अतिमह्त्वपुर्न,होने के साथ ही साथ लाभदायक भी होगा,आप सभी मुझे सहयोग देंगे यही विश्वास के साथ ....
एक शब्द में कहु तो आकर्षक केवल मात्र एक नजरिया हैं ,देखने और सोचने का एक खाश तरीका ही आकर्षक से सम्बन्ध रखता हैं, जरुरी नहीं कि मेरे नजर में जो आकर्षक हैं, वह किसी दुसरो के नजर में भी आकर्षक लगे ,मेरे मन और आखों से दुसरा नहीं देख सकता ,कुछ पुरानी उदाहरण पर जाय तो मजा आजायेगा ,भगवानो के भी जोड़ी होते हैं ,कम ऐसे भगवान् होंगे जो जोड़ी में न हो ,श्रीराधा -कृष्ण ,शिव -पार्वती,की जोड़ी तो प्रसिद्ध हैं ,श्री कृष्ण काले ,राधा गोरी ,फ़िर भी जोड़ी ऐसी की तोडें से न टूटे ये... शिव जी तो एक दम अलग ,श्मशान ,जंगल ,पर्वत आदी उनके अभिन्न मित्र ,पार्वती तो राजकन्या फ़िर शिवजी पर मोहित हो गई ?मैं आधात्मिक बातों पर नहीं जाना चाहता हूँ ,बात आकर्षक और धन से हैं, इसलिए दोनों पर ध्यान केंद्रित करना मेरा धर्म हैं ,कौआ-बगुले की जोड़ी भी रास्ते में घूमते नजर आ जाएगी,उसे देख कर मुझे अच्छा लगे या न लगे,पर उससे उनको क्या लेना देना,वे तो अपनी मस्ती में मस्त,आकर्षक मात्र विपरीत लिंग पर सीमित नहीं हैं ,पुरूष -पुरूष ,स्त्री -स्त्री ,पर भी इस मंत्र का प्रभाव कम नहीं हैं,अभी एक शिक्षक ने एक छात्री से बेमेल विवाह कर लिया ,मिडिया ने प्रकरण को नमक मिर्च लगाकर खूब उछाला,आज तो यह हाल हैं कि यह जोड़ी जहाँ भी जाती हैं वहां पर रहने आदि का खर्च की कोई चिंता ही नहीं रहता हैं ,आकर्षक भी और धन भी साथ -साथ चल रही हैं ,दुनिया मैं इस तरह के अनेक उदाहरण मिल जायेंगे ,आकर्षक दिखने के लिए कोई ऐसा सूत्र आज तक तैयार नहीं हुआ हैं जिसे वैज्ञानिक सूत्र में ढाल कर लोगों को आकर्षक बनाया जा सके ;यदि कोई ऐसा दावा करता हैं तो वह झूठा हैं ,आज गोरे होने का दावा करने वाली क्रीमों से यदि देश के सभी लोग गोरे हो जाते, तो इस देश में काले लोग नजर नहीं आते ,जैसे यह सच हैं कि कोई भी गोरेपण के क्रीमों से गोरा नहीं बना जा सकता हैं ,उसी तरह अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा से प्राभावित होकर यदि कोई काला बनना चाहे, तो वह भी सम्भव नहीं हैं ,स्मार्ट या आकर्षक देश -काल -पात्र पर निर्भर करता हैं /
हम आज परेशान इसलिए हैं कि आकर्षक का जो परिभाषा जिन लोगोने बनाया हैं उन परिभाषा को ही अन्तिम मान कर उसी का अनुशरण करना चाहते हैं ,कॉर्पोरेट जगत से जुड़े हुए लुटेरे लोगों द्वारा परिभाषित स्मार्टनेस का जो मापदंड बनाया गया हैं यदि वोही सच होता तो हर्षद ,यू .टी .आई घोटाला, केतन पारेख ,तेलगी प्रकरण ,अरबों का शेयर घोटाला ,आज सत्यम का प्रकरण ,इन सभी से जुडें तमाम घोटाले बाज क्या आकर्षक या स्मार्ट हैं ?विडम्बना हैं कि एक चोर भी इमानदार साथी खोजता हैं ,आज सत्यम के पूर्व सी इ ओ रामलिंगम राजू की पत्नी को पूंछा जाए कि तुम्हारे घोटाले बाज पति कितना स्मार्ट हैं ?तो वह क्या जबाब देगी ? रामायण में रत्नाकर दस्यु ने एक बार अपने माता -पिता को पूंछा कि मैं जो लूटपाट ,हत्या करके ,पाप कर्म द्वारा तुम लोगों का भरण -पोषण करता हूँ ,तुम लोग मेरे पाप का भागीदारी करोगे?माता- पिता ने कहा की बेटा जैसा करोगे वैसा ही फल पावोगे ,बचपन से हमने तुम्हें पाला हैं ,आज हम बुजुर्ग हो गए हैं, हमारा पालन पोषण करने का भार तुम पर हैं ,हम तुम्हारें पाप कर्म का भागीदार नहीं हो सकते हैं ,जबाब सुनकरभरी मन से यही सवाल अपनी पत्नी से पूंछा ,पत्नी ने जवाब दिया कि अग्नी साक्षी करके आपने मुझे ग्रहण किया हैं ,मेरे भरण -पोषण का भार आप पर हैं ,पापका भागीदार मैं कैसे हो सकती हूँ ? पुरी रामायण पर जाना नहीं हैं दस्यु आगे चल कर बाल्मीकी रामायण रचना करते हैं ,दस्यु के समय उसे आकर्षक किसी ने नही कहा, माता-pita
पिता,
पत्नी तक नहीं,बाल्मिकी होजाने से आज सबसे स्मार्ट ,आकर्षक ,हीरो लगते हैं ,यह तो स्पस्ट हैं की आकर्षक के लिए बाहरी आवरण से आतंरिक नियंत्रण की आवश्यकता अधिक जरुरी हैं .बाहरी आवरण द्वारा class="">धन अस्थायी रूप में भरा तो जा सकता हैं पर यह धन आगे काम नहीं आता,सत्यम के रामलिंगयम् राजू द्वारा कमाया गया धन साथ नहीं दिया ,यदि आतंरिक नियंत्रण के साथ आगे बढ़ते तो आकर्षक स्थायी बना रहता, इसलिए राधा -कृष्ण की जोड़ी आतंरिक प्रतिक हैं जिसे आकर्षक कहा गया ,कृष्ण के शाब्दिक अर्थ भी आकर्षण ही हैं .आकर्षक जीवन के लिए बहरी सजावट द्वारा दूसरो पर धौंश जमाने की मानसिकता से हमेशा दूर रहने की आवश्कता हैं ,जो आंतरिक सफाई पर ध्यान देगा ,निश्चित रूप से बहारी सफाई पर भी ध्यान जरुर देगा, आतंरिक गुणों से संपन्न लोगों के पास जो भी धन आता हैं उसका खर्च मितव्ययी होने के कारण धन की कमी कभी नहीं रहता ,लुट कर्म से ग्रसित सत्यम के रामालिंगम राजू का धन आज किस काम का हैं ?
इस दुनिया ही इतनी आकर्षक हैं की यहाँ जन्म लेकर रहना ही सार्थकता का धन हैं ,इस दुनिया में सभी लोग आकर्षक हैं ,यदि आज से मान लिया जाय की मैं आकर्षक हूँ,चाहे अन्य लोगों का सोच कुछ भी हो ,लोगों का परवाह करके हम हिन् भावना से ग्रसित हो जाते हैं ,छोटी -छोटी बातों पर ध्यान देने से हमे कभी दुखी होने की आवस्यकता नहीं होगी, नशा जीवन को घुन की भाति बरबाद कर देती हैं ,नशा किसी भी तरह की हो उससे बहुत दूर रहना चाहिए ,नशाखोर कभी आकर्षक हो ही नहीं सकता हैं ,नशा दूध का ही क्यूँ न हो .युवा अवस्था में नशा खोरों को गौर से देखने पर दया आने लगती हैं , यदि नशा से दूर होकर आत्मविश्वास के साथ जीते हैं तो ,उससे आकर्षक और कौन हो सकता हैं ,आप ऊँचे हैं ,नाते हैं ,दुबले हैं ,मोटे हैं ,काले हैं,गोरे हैं सभी आकर्षक हैं, मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की यदि नशा से दूर होकर आज से संकल्प ले की मुझे एक अच्छी जीवन जीना हैं ,तो देखेंगे की धन की कमी कभी नहीं रहेगी .वर्त्तमान समय में धन की असंतुलित वितरण ही सुंदर जीवन के मार्ग में कुछ कांटें हैं यदि इसे दूर करने में थोडी चिंतन करें तो आकर्षक बनने के साथ -साथ धनवान बने रहेंगे ,नशा युवा पीढ़ी को सोचने से रोकती हैं ,नशा छोड़ अपने बारे में ,समाज के बारे में ,देश के बारे में ,सोचने लगे तो इस देश के सभी स्मार्ट और सभी धनवान नजर आवेंगे .




1 टिप्पणी:

  1. very true, today the youth is losting their attractiveness, becoming druggists. so, its very nice saying that we've to teach the youth for this.......

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