शनिवार, 26 सितंबर 2009

ब्लोगर बंधुओं मुझे आपका सलाह चाहिए !

ब्लोग लिखकर क्या फायदा ! समय ,स्वास्थ्य और धनहानि के सिवाय कुछ भी हॉंसिल नहीं होता ,रात-रात भर जगते हुए कुछ लिखना, जिससे समाज और देश का भला हो सकें ,परन्तु मैं यह देख कर हैरान हो जाता हूँ कि अधिकांश ब्लोगर्स स्वप्रचार में ही व्यास्त रहते हैं । कुछ पोस्ट उच्चकोटि के होते हुए भी लोग उसे पढना नहीं चाहते ,स्वप्रचार एक विज्ञापण के सिवाय कुछ भी नहीं हैं । ब्लोग लिखना आज सस्ता विज्ञापण साबित हो रहा है ।

अब पढने वाले भी कितने है ...अधिक पढे जाने वाले पोस्ट लगभग 175 से 200 तक सिमीत हैं ,जितने समय और धन बरबाद हो जाती हैं वही साधन यदि समाचार पत्रों में पर्चा छपवाकर बटवा दिया जाए, तो ज्यादा उपयोगी और असरदार होने की सम्भावना अधिक हो जाने से मुझे लगता है कि ब्लोग में अधिक ध्यान देना सही प्रतित नहीं होता ।

मै उक्त बातों से सम्पूर्ण सहमत भी नहीं हूँ ...हर सोच की दो पहलू होती हैं ,पहला जो तत्काल दिमाग में आता हो और दूसरी तो दिमाग सोचने के लिए तैयार ही नहीं होती ,मनोवैज्ञानिक क्या कहते है यह मुझे पता नहीं , परन्तु मैं दूसरी पहलू के लिए सभी ब्लोगर्स बन्धुओं और मेरे अनुसरणकर्ताओं से निवेदन करना चाहता हूँ कि जिस अनछुए पहलू को मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कृपया मुझे मार्गदर्शन करने का कष्ट करें ।

देश में क्रान्तिकारि परिवर्तण की आवश्यकता हैं ,लेकिन जब क्रान्ति की बाते आती हैं तो कृपया मुझे कोई कम्युनिष्ट न कहे ,यह शब्द मुझें आज गाली जैसी लगती हैं । फ्रान्स में हाब्स,लॉक,रूसो जैसे तिकड़ी ने एक इतिहास रचना कर अमर हो गए ,मैं फ्रांस की क्रांति से अधिक प्रभावित हूँ

मुझे समाजवाद से लगाव तो हैं परन्तु आयात किया गया समाजवाद से कोई सरोकार नहीं हैं ,आज समाजवाद का तो आधार ही नहीं रह गया हैं । रूस ,चीन ,जैसे समाजवादी देश अमेरिका के पिछलग्गु बन गए हैं,ऐसी स्थिति में समाजवाद एक सपना साबित हुआ ।

सभी को बराबर का दर्जा नहीं दिया जा सकता हैं ,प्राकृतिक नियमानुसार सभी प्राणी को जीने का अधिकार हैं ,कम्युनिस्टों ने तो मात्र विचार भिन्नता के कारण से उत्पन्न भावनाओं को कुचल देता हैं ,जब विचार ही नहीं रहेगा तो आगे बढने की साधन भी समाप्त हो जाता हैं ,इसिलिए आज कम्युनिस्ट आन्दोलन मृत प्राय: हो चुका हैं ।

मैंने विचारों से सम्बन्धीत और इन विचारों से देश में एक क्रान्तिकारि परिवर्तण कैसे हो सकें इस बात को अधिक महत्व देता हूँ ,अत: सभी बन्धुओं से विचार जानने को उत्सुक हूँ ,मात्र लिखने के लिए लिखना , किसी भी रूप से मान्य योग्य नहीं हैं ।

एक बात स्पश्ट रूप से लिखना भी आवश्यक हैं कि क्रान्ति का अर्थ परिवर्तण से हैं ,वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तण करते हुए जो धन सम्पत्ति मुठि्ठ भर लोगों में केंद्रित हो चुकी हैं उसे उचित इस तरह विकेंद्रियकरण करना जिससे कि धन सम्पदा का लाभ सभी को समुचित हो सकें और समाज में सन्तुलन की स्थिति बनी रहे ,बराबरी की कल्पना मैं नहीं करता । गुणानुपात के मूल्यांकण को आधार माना जा सकता हैं ।

बन्धुओं याद रखो ....उक्त परिवर्तण का रूप भले ही कुछ बदलता हुआ व्यावहारिक भूमि पर फुलता फलता दिखें ,पर विचारानुसार लगभग परिवर्तण को कोई रोक नहीं पाएगा ,अत: परिवर्तण वेला में साथ देकर युग धर्म का निर्वाहन करना ,सभी का पुणित कर्तव्य हैं ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है, आजकल कम्युनिष्ट शब्द गाली ही बनकर रह गया है

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  2. "एक बात स्पश्ट रूप से लिखना भी आवश्यक हैं कि क्रान्ति का अर्थ परिवर्तण से हैं ,वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तण करते हुए जो धन सम्पत्ति मुठि्ठ भर लोगों में केंद्रित हो चुकी हैं उसे उचित इस तरह विकेंद्रियकरण करना जिससे कि धन सम्पदा का लाभ सभी को समुचित हो सकें और समाज में सन्तुलन की स्थिति बनी रहे ,बराबरी की कल्पना मैं नहीं करता । गुणानुपात के मूल्यांकण को आधार माना जा सकता हैं ।"
    आपका यह विचार उत्तम है । यही तो कम्यूनिस्म का मूल सिद्धानत है । परिवर्तन तो सतत चलने वाली प्रक्रिया है जैसे बीज बोने के बाद उसके अंकुरण की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है
    आप बिलकुल भी निराश न हो ं ब्लॉगिंग के माध्यम से बीज बोने का कार्य करते रहें । यदि इसका फल अभी न मिले तो आनेवाली पीढियों को मिलेगा । स्वप्रचार मे व्यस्त लोगो से आपका मार्ग अलग है आप लीक से हटकर चलने वालों मे से हैं । मार्क्सवाद पर आपका विश्वास है यह अच्छी बात है । इसका अध्ध्ययन देश काला नुसार करें तभी यह सार्थक हो सकता है ।

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  3. ,कम्युनिस्टों ने तो मात्र विचार भिन्नता के कारण से उत्पन्न भावनाओं को कुचल देता हैं .shahi nahi hai.

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  4. समय अपनी गति से चलता रहता है...इसे चलते रहना देना चाहिए..

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  5. आजकल कम्युनिष्ट शब्द गाली ही बनकर रह गया है

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  6. परिवर्तण वेला में साथ देकर युग धर्म का निर्वाहन करना ,सभी का पुणित कर्तव्य हैं -सहमत हैं आपसे-सही कह रहे हैं.

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